सोमवार, १९ ऑगस्ट, २०१३

सरपरस्त..

हमें फ़िक्र मेंहंगाईकी, बनती -गिरती सरकारोंकी… 
रुपयेकी घटती कीमत की, फ़िल्मी दुनियाँके सितारोंकी… 
इस पूरी दुनियाँसे परें, जो खामोश अपना फ़र्ज़ निभाएं जातें हैं।  
जो हम सबसे गुमनाम, चुपचाप हमारी सरपरस्ती कियें जातें हैं। 

जिनकी शहादतकी खबरें अखबारोंके किसी छोटेसे कोनेमे छपवाई जाती हैं।  
वहीँ जहाँ टीम इंडिया की जीत या किसी नेता की दलबदली भी सुर्खियाँ बन जाती हैं।  
जिनकी जिंदगियोंकी कीमत चंद रुपयोमें तौलकर सरकारेंभी अपने फ़र्ज़से अलहिदा हो जातें है।  
हाँ वहीँ, जो हम सबसे गुमनाम, चुपचाप हमारी सरपरस्ती कियें जातें हैं। 

सलाम उस जज़बेको जो हर एक सिपाही अपने सीनेमें लिए जीता है। 
सलाम हर उस शहीदको जो बड़ी शिद्दतसे वतनपे मर मिटता है। 
हम अपनीही दुनियांमें मशगुल अपनी रोजमर्राकी छोटी-छोटी बातोंको लेकर परेशान रहते हैं।  
बिलकुल बेखबर, अंजान के कहीं सरहद्पर जाने कितने दिलेंर हररोज वतनपर शहीद हुवां करतें हैं।  
हाँ वहीँ, जो हम सबसे गुमनाम, चुपचाप हमारी सरपरस्ती कियें जातें हैं। 

-विनायक कांबळे 

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